Sunday, 9 February 2014

Spiritual walks and Rocky roads - Note

कुछ मैंने पढ़ा उसको भाव रूप में सबसे शेयर करना चाहती हुँ , " लौकिक प्रेम और अलौकिक प्रेम सक्षेप में समझा जा सकता है "


Theresa LePre (face book friend, author from USA )
" Walking down the spiritual path is sometimes like walking down a rocky road. Its quite normal to wonder to yourself, as you're expanding,what does it take to keep living love?  That's the flow and the key essential to the path. You have to be ready within yourself to own it. This is the big kahuna, you own your dues on as you experience your true life purpose. You're on a life path of that has many facets with a collective purpose in coming together as one in a unified truth. I would say we still have work to do, do you agree? That's where I'm going with this today. 

The answers are coming as we are expanding and growing but they are not all in place yet. As people are awakened, its like you want to be a crusader, you want your voice heard, to make a difference. That's all cool, however don't forget along the way the true purpose of the journey. Lets not become radical and believe we are arriving and the next person is not because we feel we are ascending faster. I have to put this out there, I think you all rock and it has to be discussed. Experiencing the completion of unconditional love, takes effort and patience. Make no mistake, you better be ready to do your own 'cold turkey' to get there.  Its a two way street (you all can relate to that).  Today I leave you with this: Rock your journey from the heart, be willing to be vulnerable and take a chance and enjoy the feeling of truly giving from the heart space. I think you are all so freaking fabulous. Keep rocking," 



प्रेम के दोनों ही रूपं में विकास यात्रा के साथ ही अनबुझे प्रश्नो के उत्तर या हल मिलते है कुछ अंदर है जो विकसित हो रहा है पर अपनी अपनी गति और अपने यात्रा के पड़ाव अनुसार , हर पड़ाव कुछ कहता जाता है , हर विराम कुछ समझाता चल रहा है। और यात्रा आगे को , यानि कि उर्ध्वमुखी हो रही है। आपको आपके प्रश्नो के उत्तर भी मिल रहे है , पर आपके कौतूहल से नहीं आपके आत्मिक और शारीरक विकास और अनुभूति के अनुसार। 


आप प्रेम की डगर पे है , जो उबड़ खाबड़ है , जहाँ पत्थर आपकी योजना अनुसार नहीं मिलते , वरन मिलते हुए पत्थरो के अनुसार स्वयं को विकसित करना है। 

जीवन डगर अध्यात्म की भी ऐसी ही प्रेम डगर है। कोई फर्क नहीं है। इसीलिए आपके द्वारा ध्यान मे बहाव , आपकी कल्पनाये आपकी अति सहायक सिध्ह होती है। क्यूंकि जो है उनसे अधिक तो आपकी कल्पनाये भी नहीं है। 





आप सहज ध्यान में उतरते ही अपने प्रश्नो के उत्तर पाने लगते है. ध्यान रहे यहाँ शब्द उतरना अत्यंत प्रयास रहित है , बहाव के साथ है विकास और जागरूकता के साथ है।

(
राधा ऐसी प्यासी आत्मा के रूप में चिन्हित की जाती रही है जो अलौकिक प्रेम का प्रतीक है , आत्मा और परमात्मा का ,और कौतुहल से ठीक आगे सटा हुआ जंगल का अंधकार , रस्ते उबड़ खाबड़ , जंगल के घने रस्ते डरावने , कभी मनमोहक , तो कभी घातक। पर आत्मा अपने परमात्मा से एक लय होने को उत्सुक है या नहीं , पर यात्रा पे है। किसी किसी को ज्ञान आ भी गया तो वो अब वो गठरी लादे नहीं बल्कि गठरी उसके साथ स्वतः चल रही है एकदम भारहीन होके, जिस किसी को ख्याल नहीं वो अपनी अपनी गठरी के साथ सर पे लादे चल रहा है. सब प्रतीक है , सब इशारा है , उसी परमात्मा की ओर . 




राधा को ज्ञान है , गोपियों को नहीं , कृष्णा प्रेम में राधा भी है और गोपियाँ भी , पर राधा निर्भार और गोपियाँ पीड़ा में। किसी भी पात्र के सांसारिक अर्थों चारित्रिक विश्लेषण से लाभ नहीं होने वाला , क्यूंकि अंधकार में अंधकार ही मिलेगा। वैसे भी चित्र केवल संकेत मात्र ही है , समस्त कथाओ का उद्देशय आपको सत्य से साक्षात्कार करवाना मात्र है )


ॐ प्रणाम।

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