Tuesday, 11 February 2014

निर्जरा--कर्म-मल का झड़ जाना- Osho



निर्जरा--कर्म-मल का झड़ जाना :-

आपके और आपके बच्चे के बीच तो भौतिक जगत फैला हुआ है। यह विचार किसी गहरे अर्थों में भौतिक ही होना चाहिए, अन्यथा इस भौतिक माध्यम को पार न कर पाएगा।

यह जानकर आपको हैरानी होगी कि महावीर ने कर्म तक को भौतिक कहा है--फिजिकल कहा है, मैटीरियल कहा है। जब आप क्रोध करते हैं और किसी की हत्या कर देते हैं, तो आपने एक कर्म किया--क्रोध का और हत्या करने का। महावीर कहते हैं, यह भी सूक्ष्म अणुओं में आपमें चिपक जाता है; कर्म-मल बन जाता है। यह भी मैटीरियल है। यह भी कोई इम्मैटीरियल चीज नहीं है, यह भी मैटर की तरह पकड़ लेता है आपको। और इसलिए महावीर निर्जरा जिसको कहते हैं, वे निर्जरा कहते हैं, इस कर्म-मल से जिस दिन छुटकारा हो जाए। यह सारा का सारा जो कर्म-अणु आपके चारों तरफ जुड़ गए हैं, ये गिर जाएं। जिस दिन ये गिर जाएंगे, उस दिन आप शुद्धतम शेष रह जाएंगे; वह निर्जरा होगी। 
निर्जरा का मतलब है: कर्म के अणुओं का झड़ जाना। कर्म भी...जब आप क्रोध करते हैं तब आप एक कर्म कर रहे हैं। वह क्रोध भी आणविक होकर ही आपके साथ चलता है। इसलिए जब आपका यह शरीर गिर जाता है, तब भी उसको गिरने की जरूरत नहीं होती; वह दूसरे जन्म में भी आपके साथ खड़ा हो जाता है, क्योंकि वह अति सूक्ष्म है। 

तो मेंटल बॉडी जो है, मनस शरीर जो है, वह एस्ट्रल बॉडी का सूक्ष्मतम हिस्सा है। और इसलिए इन चारों में कहीं भी कोई खाली जगह नहीं है, ये सब एक-दूसरे के सूक्ष्म होते गए हिस्से हैं। मेंटल बॉडी पर काफी काम हुआ है, क्योंकि अलग से मनस-शास्त्र उस पर काम कर रहा है--और विशेषकर पैरा-साइकोलाजी उस पर अलग से काम कर रही है, परा-मनोविज्ञान अलग से काम कर रहा है। और मन के इतने अदभुत खयाल विज्ञान की पकड़ में आ गए हैं--धर्म की पकड़ में तो बहुत समय से थे--विज्ञान की पकड़ में भी बहुत सी बातें साफ हो गई हैं। - ओशो....









आपके और आपके बच्चे के बीच तो भौतिक जगत फैला हुआ है। यह विचार किसी गहरे अर्थों में भौतिक ही होना चाहिए, अन्यथा इस भौतिक माध्यम को पार न कर पाएगा


यह जानकर आपको हैरानी होगी कि महावीर ने कर्म तक को भौतिक कहा है--फिजिकल कहा है, मैटीरियल कहा है। जब आप क्रोध करते हैं और किसी की हत्या कर देते हैं, तो आपने एक कर्म किया--क्रोध का और हत्या करने का। महावीर कहते हैं, यह भी सूक्ष्म अणुओं में आपमें चिपक जाता है; कर्म-मल बन जाता है। यह भी मैटीरियल है। यह भी कोई इम्मैटीरियल चीज नहीं है, यह भी मैटर की तरह पकड़ लेता है आपको। और इसलिए महावीर निर्जरा जिसको कहते हैं, वे निर्जरा कहते हैं, इस कर्म-मल से जिस दिन छुटकारा हो जाए। यह सारा का सारा जो कर्म-अणु आपके चारों तरफ जुड़ गए हैं, ये गिर जाएं। जिस दिन ये गिर जाएंगे, उस दिन आप शुद्धतम शेष रह जाएंगे; वह निर्जरा होगी।
निर्जरा का मतलब है: कर्म के अणुओं का झड़ जाना। कर्म भी...जब आप क्रोध करते हैं तब आप एक कर्म कर रहे हैं। वह क्रोध भी आणविक होकर ही आपके साथ चलता है। इसलिए जब आपका यह शरीर गिर जाता है, तब भी उसको गिरने की जरूरत नहीं होती; वह दूसरे जन्म में भी आपके साथ खड़ा हो जाता है, क्योंकि वह अति सूक्ष्म है।

तो मेंटल बॉडी जो है, मनस शरीर जो है, वह एस्ट्रल बॉडी का सूक्ष्मतम हिस्सा है। और इसलिए इन चारों में कहीं भी कोई खाली जगह नहीं है, ये सब एक-दूसरे के सूक्ष्म होते गए हिस्से हैं। मेंटल बॉडी पर काफी काम हुआ है, क्योंकि अलग से मनस-शास्त्र उस पर काम कर रहा है--और विशेषकर पैरा-साइकोलाजी उस पर अलग से काम कर रही है, परा-मनोविज्ञान अलग से काम कर रहा है। और मन के इतने अदभुत खयाल विज्ञान की पकड़ में आ गए हैं--धर्म की पकड़ में तो बहुत समय से थे--विज्ञान की पकड़ में भी बहुत सी बातें साफ हो गई हैं। - ओशो

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