Monday, 24 February 2014

तीसरी आँख ... कुण्डलिनी .... भाव और आप : (abstract In Hindi and jaggi vasudev in english )



ॐ 


जिसको हम सभी तीसरी आँख के नाम से जानते है , या फिर शिवा का तीसरा नेत्र कहते है , हमको जरुरत है समझने की कि आखिर वो है क्या !! आप इसको इसके शाब्दिक अर्थ या फिर तार्किक रूप से नहीं ले सकते , अक्सर व्यक्ति इसको इसके शाब्दिक अर्थ से ले के तर्क के माध्यम से समझाना चाहते है आयामों को तर्क से नहीं बल्कि कथाओ के माध्यम से समझाने की और संजोने की चेष्टा की जाती रही है , आप ऐसे समझे कि तीसरा नेत्र वो आयाम है वो ऊंचाई है जहा पर पहुँच के व्यक्ति को एक नयी साफ़ सुथरी दृष्टि मिलती है , जहाँ उसके सोच और विचार को नजरिया मिलता है जीवन के प्रति , बिलकुल नए आयाम में , ये तीसरा नेत्र जब विक्सित होता है , तो सिर्फ अंदर ही नहीं बाह्य जगत के प्रति भी दृष्टि बदल जाती है , व्यतक्ति कि सामान्य दृष्टि सिर्फ बाहर ही देख पाती है , और बहुत सीमित दृष्टिकोण से। । अब ये जिज्ञासा कि आखिर इसको एक शरीर के भाग के साथ ही क्यूँ जोड़ा गया है , साथ चारो में जो छठा चक्र है अज्ञान चक्र वो मस्तक के मध्य में है दो भौं के मध्य ........ वास्तव में ये आँख अध्यात्मिक अनुभव की है।

आप सभी इस मूलभूत बात से वाकिफ होंगे , जानकारी होगी कि सम्पूर्ण अध्यात्मिक यात्रा , गुणात्मक विचारगत वृध्ही करते हुए अपनी अध्यात्मिक यात्रा अन्यतम स्तर पे पहुँचते है ; है ना ! आप इसको योग द्वारा करें या फिर कुण्डलिनी जागरण द्वारा अथवा ध्यान द्वारा , मूलभूत वैचारिक अर्थ सिर्फ यही है कि सीमित शारीरिक स्थिति के द्वारा असीमित उच्च संभावनाओ में प्रवेश करना है।

" तो अगर आपकी ऊर्जा को समझे प्रथम चक्र मूलधारा से , खाना और सोना , ये सबसे अधिक अनिवार्यता है . इसके आलावा आप खुछ नहीं जानते , यदि आपकी ऊर्जा स्वधिष्ठान्ना में विकसित हो रही है तब आप इस शारीरिक संसार को मनोरंजन के साथ जीते है , विभिन्न विषयों में। यदि आपकी ऊर्जा मणिपुर में विकसित हो रही है तब आपमें संकल्प कि शक्ति आती है आप में कुछ पाने कि इक्षा जगती है। यदि आपकी ऊर्जा अनाहत चक्र में जागृत होती है , आप रचनाकार होते है कलाकार होते है । यदि आपकी ऊर्जा विशुध्धि चक्र में विकसित ह रही है , आप वाणी के ऊर्जा स्रोत होने लगते है सिर्फ शारीरिक नहीं मानव कि शक्ति विभिन्न अप्रदर्शित स्रोत का पुंज है। जब आपकी चक्र यात्रा अज्ञान चक्र पे आती है तो आपमें दृष्टिगत विचारगत सफाई आने लगती है।

तब आप ( INTELLECTUALLY)बौद्धिकता की दृष्टि से विषय को समझने लगते है अध्यात्मिक रूप से समझने लगते है तब आपको सांसारिक जीवन के सुख दुःख प्रभावित नहीं करते , पर फिर भी आप एक्सट्रिक नहीं है , आपको जीवन का सौंदर्य अनुभव नहीं परन्तु अब आप में भावनात्मक संतुलन है , मूलाधार से अज्ञान तक पहुँचने के कई रास्ते और तरीके है। परन्तु अज्ञान से सहस्त्रा तक पहुँचने का कोई रास्ता नहीं यह पथविहीन पथ है ..............................................................................."

यही कारन है कि अधिकतर लोग शांति के बारे में कहते समझते दिख सकते है , क्यूंकि वो अज्ञान तक आये है , इसलिए वो अंदाजा लगाते अपना दृष्टिकोण आप तक पहुंचाते है , कोई तरीका है ही नहीं , बस एक छलांग है अनंत में और बिना वजह आप आनंद से भर जाते है। फिर आपको बाहर से आनन्दित होने के उपकरणों की आवश्यकता नहीं , सिर्फ एक ही शब्द है ECSTASY बिना कारन आनंदित।

कोई लॉटरी नहीं कोई बाहर खाने का आयोजन नहीं , क्यूंकि आपकी समस्त ऊर्जा से सहस्त्रधार को छुआ है , यहाँ पे अज्ञान चक्र पे आपको अपनी इस तीसरी आँखको अंदर कि तरफ घूमना होता है , और दूसरा कोई रास्ता ही नहीं , सिर्फ छलांग , या तो आप सनकी हो जायेंगे या फिर आप किसी अनदेखे में इतना विश्वास करेंगे कि आप उस छलांग को लेने को तैयार हो जायेंगे। यहाँ कोई आँख शारीरक नहीं जो खुलेगी सिर्फ आपका वैचारिक परिवर्तन होगा।

किसी ने पूछा : क्या ये इंटूटिव दिमाग के कारन अनुभव होगा ,

नहीं नहीं , दिमाग को हम पूरा उपयोग कर ही नहीं सकते , मानव उपयोग नहीं कर सकता , कुछ समय के लिए आँख बंद करके सांकेतिक तरंग को अनुभव किया जा सकता है , एक अपाहिज का कोई विशेष ज्ञान विशेष आवाज में विकसित हो जाता है , एस्ट्रोलॉजी भी या कुछ अन्य परा विज्ञानं .......................... ऐसे ही ही है , सांकेतिक विज्ञानं।

( discussion On chakras and third eye Of shiva of Jaggi Vasudev , you can hear in english also In below link )






http://youtu.be/9kL5mS7MD4I

Om

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