Sunday, 16 March 2014

Note - ज्ञान कोई पोखर में पड़ा जल नहीं जो अटक जाये ..............ये तो सरस्वती नदी की धार है !

ज्ञान कोई पोखर में पड़ा जल नहीं जो अटक जाये फंस जाये किसी एक तालाब में पड़ा हुआ सड़ जाये या फिर वहीं पे पड़ा_पड़ा भाप बन के उड़ जाये। ये तो सरस्वती नदी की धार है ; जो उतर रही है कहीं ऊपर से लगातार अनवरत , बह रही है, सबके लिए आह्वाहन करती , दबाव नहीं ; आमंत्रण देती हुई ये जल धार कहती है , तुम भी आओ .... तुम भी आओ , चुल्लू बनाओ , और भर लो जल अंजुली में , और इसके पहले अंजुली का जल रिस जाये और तुम्हारे हाथ खाली हो जाये , पी लो , घूँट घूँट उतार लो इसको अपने अंदर , न सोचो कि ये घाट मेरा या तेरा या उसका है , प्यास तुम्हारी और शीतल जलधार सामने बह रही है। 



एक दूसरे की आलोचनाओं में अवसर न गवाओं।
किस के पास से आया !
कहाँ से आया !
कौन सच्चा !
कौन झूठा .......................................................! 

ये वार्ता का विषय ही नहीं , ज्ञान तो सदा से प्रवाह शील है , परंपरा से बहता आया है , एक व्यक्ति से दूसरे और तीसरे ...... इसकी भी अपनी प्रवाह परंपरा है , जिसको जानने और समझने की जरुरत है , न कि इस विवाद में पड़ने की, कि किसको ! किससे ! और कब ! ज्ञान मिला , कौन निम्न स्तर पे ! कौन उच्च स्तर पे ! कौन पहले ज्ञानी हुआ और कौन बाद में ? ये प्रश्न सब दिमागी पचड़ो की निशानिया है।

वास्तविकता सिर्फ इतनी है की आपको उस तक जाने का इशारा मिल रहा है , उसको देखना है , उस इशारे को देखो और आगे बढ़ जाओ , बाकि सब चक्कल्लस है प्रपंच है , दिमाग का खेल है।

स्वयं को सावधान करने की जरुरत है !

यदि आप विषय _केंद्रित रहोगे तो संसार में जहाँ भी जाओगे आपको आपका वांछित ज्ञान ही मिलगा , तभी तो कहते है कि " यदि लगन सच्ची हो तो सारी कायनात आपके लिए मदद करने को सक्रिय हो जाती है "

सच्ची लगन यही है की आप का केंद्र सक्रिय हो जाए और जिस दिशा में केंद्र सक्रिय होता है प्रकृति भी उसी तरफ मदद करती है। यक़ीनन !!

जब भी मन भटके , दिमाग तर्क करे , सावधान होने की आवश्यकता है ! जब भी प्रपंच में आनंद मिलने लग जाये , स्वयम को सावधान करने की आवश्यकता है , हमारा लक्ष्य ये नहीं , किंचित पथ से भटक रहे है ,स्वयं को बताने की आवश्यकता है। ज्ञान का रास्ता एकदम सीधा और सच्चा है , कहीं कोई घुमाव है ही नहीं , अगर कहीं घूमने का दिल करे , तो स्वयं को सावधान करने कि आवश्यकता है।

और ध्यान रहे सावधान स्वयं को करना है , अन्य अपना कार्य स्वयं करेंगे आपको उनके निमित्त सही और गलत जैसी भ्रामक आलोचनाओ में उलझने कि आवश्यकता नहीं।


Om Om Om

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