Friday, 17 January 2014

वो परमात्मा है- note

जो अखंड है , एक है , वो परमात्मा है , जिसकी ज्योति तले समग्र ब्रह्माण्ड है वो परमात्मा है , और परम आश्चर्यजनक सत्य 
( वो भी किसी एक जगह नहीं बैठा है; हमारा स्वागत करने को और हमारे लिए स्वर्ग और नरक की रचना रचने के लिए वो व्यस्त नहीं )
उसने अपने ही घेरे के दूसरे चरण को पूरा किया है ,पुनः सर्वव्याप्त हो के । कह सकते है , प्रथम चरण में द्वैत और द्वितीय चरण में अद्वैत बस यही है उसका पूरा परिचय। अब इस घेरे को आप किस तरह से भी घुमा के ; कैसे भी समझो । पूरा वर्तुल यही है। 


The Inseparable, Is One and that is " God " , from whose Under light is the whole universe rotating.. That is Divine, and amazing ultimate truth ( he is not sitting in a One place to welcome us / to reject us , or he's busy for us to create heaven and hell , not at all ) he has fulfilled Only his own circle; , Curb omnipresent again. In the first phase can say this is a complete In duality and non-duality introduced in Phase two . Now this kind of Circle to understand from where to_do start to understand , you have to do by you Individually . either it may from Dwait or from Adwait . this is the whole Garden pea .

ॐ प्रणाम

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